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Single phase power supply and three phase power supply | Engineer Dost

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AC power supply को मुख्यतः दो भागोँ मैैं विभाजित किया जा सकता है। 

  1. Single phase power supply 
  2. Three phase power supply

दोस्तो यदि दोनो supply को अलग करें तो सबसे बड़ा अंतर conductor या wire का होगा क्यों की सिंगल फेज पावर सप्लाई में 2 कंडुक्टर और 3 फेज पावर सप्लाई में 4 कंडुक्टर होते हैं। सिंगल फेज सप्लाई के फेज को P से तथा न्यूट्रल को N से प्रदर्शित करते हैं। इसी प्रकार थ्री फेज सप्लाई के तीनो फेज को क्रमशः R,Y, B तथा न्यूट्रल को N से दिखाया जाता है। जहाँ पर R,Y, B को क्रमशः Red, Yellow, Blue रंगों से दिखाते हैं। ( ये भारत में रंगों का Standard है country के हिसाब से अलग अलग हो सकता है। ) 


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1-फेज सिस्टम और 3-फेज सिस्टम को आवश्यकता अनुसार उपयोग में लाया जाता है। वैसे तो Electricity का बड़े स्तर पर generation और  Transmission 3-फेज में ही होता है। लेकिन हमारे घरों में जो सप्लाई आती है वो 1-फेज सप्लाई होती है। 

जिस consumer का load 5-7kw से ऊपर का है तो उन स्थानों में 3-फेज सप्लाई दी जाती है और जहां पर load इससे काम मात्रा में होता है वहां पर 1-फेज सप्लाई से आपूर्ति की जाती है। 

अतः 1-फेज सप्लाई का उपयोग छोटे उपकरणों जैसे- TV, Fridge, Fan, Cooler, आदि में किया जाता है। और 3 फेज सप्लाई का उपयोग 3-फेज मशीनों, कारखानों,बड़ी कंपनियों में किया जाता है। 

Single phase power supply



दोस्तो Generator या alternator के stator winding (Permanent magnet) के Slots (2 terminals) के बीच में Rotor winding या Current carrying cunuctor को Turbine के द्वारा घुमाया जाता है तो Stator flux और  Rotor flux का आपस में linkage होता है जिससे EMF induced होता है। यदि load के साथ Circuit close है तो resultant current भी प्रवाहित होती है। जिसमे एक फेज और एक न्यूट्रल होता है। दोस्तो 1-फेज पावर सप्लाई में अधिकतम voltage 230volt तक रखा जाता है। 


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Three phase power supply



दोस्तो इलेक्ट्रिसिटी जनरेशन का सिद्धांत ऊपर बताया गया है जिसमे यदि स्टेटर वाइंडिंग के 3 slot (6 terminals) को 120° के कोण पर रखा जाए तो स्टेटर वाइंडिंग के और रोटर वाइंडिंग के फ्लक्स के बीच लिंकेज होता है यदि circuit में कोई load कनेक्टेड है तो तीनो circuit में resultant current प्रवाहित होती है। दोस्तो 3-फेज पावर सप्लाई में प्रत्येक फेज से फेज के बीच अधिकतम 440volt (Line voltage standard 415volt) होती है। और प्रत्येक फेज और न्यूट्रल के बीच अधिकतम 230volt ( Phase voltage) रखा जाता है।



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1-फेस पॉवर सप्लाई और 3-फेस पॉवर सप्लाई में अंतर


  • 1-फेज पावर सप्लाई को 2 वायर सिस्टम (P और N) तथा 3 फेज सप्लाई को 4 वायर सिस्टम (R, Y, B और N) भी कहा जाता है।
  • 3-फेज सप्लाई में तीनो फेज 120° के कोण पर विस्थापित होते हैं जबकि 1-फेज सप्लाई में एक फेज होने की वजह से ऐसा नही होता है। 
  • 120° के कोण का फेज डिफरेंस होने से पावर कॉन्टिनुएस फ्लो होता है क्यो कि जब एक फेज 0 पर होता है अन्य दो फेज 0 पर नही होते हैं जबकि सिंगल फेज सप्लाई में एक ही फेज होता है।
  • जब कभी ट्रांसमिशन लाइन में फॉल्ट आता है तो सिंगल फेज सप्लाई में पावर का शटडाउन हो जाता है। जबकि थ्री फेज सप्लाई में एक फेज में फॉल्ट आने पर अन्य दो फेज से पावर का फ्लो होता है। 
  • 1-फेज सप्लाई का इलेक्ट्रिकल नेटवर्क सरल तथा 3-फेज सप्लाई का इलेक्ट्रिकल नेटवर्क जटिल होता है। 
  • 1-फेज सप्लाई, 3-फेज सप्लाई की तुलना में ज्यादा सस्ती (इकोनोमिकल) होती है। 
  • 3-फेज सप्लाई ज्यादा efficient होती है क्यो की इसमे पॉवर फ्लो 3-फेज सप्लाई से 1.5 गुना होता है। 3-phase power flow= 1.5(1-phase power flow)
  • 1-फेज पावर सप्लाई के कनेक्शन के प्रकार नहीं हैं जबकि 3-फेज  सप्लाई को हम Star connection और Delta connection में जोड़ सकते है। 
  • दोस्तो ज्यादातर पावर ट्रांसमिशन हाई वोल्टेज में ही किया जाता है क्यो की Low वोल्टेज में सिस्टम Losses ज्यादा हो जाते हैं अतः ट्रांसमिशन के लिये भी 3-फेज सप्लाई उपयोगी है। 
  • प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से आये लाइन फॉल्ट या इलेक्ट्रिक शटडाउन की मरम्मत हेतु 1-फेज सप्लाई में लेबर कॉस्ट ज्यादा लग जाता है।


न्युट्रल कहाँ से आता है?



दोस्तो अधिकतर पावर स्टेशनों में इलेक्ट्रिक पावर का जनरेशन (11KV, 33KV, 110KV आदि) 3-फेज में ही किया जाता है। और इसका ट्रांसमिशन भी 3-फेज और हाई वोल्टेज में ही किया जाता है। दोस्तो जैसा की हम पहले ही बात कर चुके हैं की 1-फेज सप्लाई का हमारे घरों में ज्यादा उपयोग किया जाता है। जबकि 3-फेज सप्लाई को बड़े-बड़े मशीनों, कारखानों, या कंपनियों में उपयोग किया जाता है। 

इलेक्ट्रिकल पावर हमारे घरों में पहुचने से पहले डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर के प्राइमरी इनपुट पर जाती है जो की Delta connected होता है तथा सेकेंडरी वाइंडिंग जो की Star connected होता है, के आउटपुट पर मिलती है। इसी आउटपुट से हमको न्यूट्रल (N) प्राप्त होता है और प्रत्येक फेज के साथ इस न्यूट्रल को ऐड करके उपभक्ताओं को दिया जाता है। 
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दोस्तो ऊपर फिगर में दिखाया गया है की 3-फेज कंडक्टर से output मैं 4-कंडक्टर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर के बाद मिलता है। जिसमे से एक फेज और न्यूट्रल प्रत्येक घर में दे दिया जाता है। इसी स्टार कनेक्शन के द्वारा हम 230volt सप्लाई का यूज़ अपने घरो के उपकरणों में कर पाते हैं। दोस्तो सिंगल फेज और थ्री फेज में और भी अंतर हो सकते हैं हमने सम्भव डिफरेंसेस को इस आर्टिकल में लिखा है। 

आशा करते हैं दोस्तो Single phase power supply and three phase power supply /सिंगल फेज पावर सप्लाई और थ्री फेज पावर सप्लाई की जानकारी से आप सहमत होंगे यदि इस पोस्ट मैं कोई गलती या सुधार करना हो तो आप नीचे comment box मैं बता सकते हैं।
धन्यवाद। इंजीनियर दोस्त 
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