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Static Electricity in Hindi | स्थैतिक इलेक्ट्रिसिटी | Engineer Dost

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Static Electricity Introduction



दोस्तो हमारे घरों तक विद्युत धारा पहुचने से पहले हमको स्थैतिक आवेश (Static Eleectricity/ Static charge) के बारे में ज्ञात था। स्थैतिक आवेश का अर्थ फिक्स्ड चार्ज से है। जो एक जगह से दूसरे जगह गति या मूव नही कर सकता है इसके विपरीत विद्युत धारा मूव कर सकती है। 
 


Static Electricity in Hindi | स्थैतिक इलेक्ट्रिसिटी | Engineer Dost



स्थैतिक आवेश का इतिहास



दोस्तो 600 BCE मैं Thales of miltus(Greek वैज्ञानिक, गणितज्ञ) के द्वारा अम्बर की लकड़ी को बिल्ली के बाल पर रगड़ने पर एक आकर्षण बल के बारे मैं पता लगा जिसे Static charge(स्थैतिक आवेश) कहा गया था। 

स्थैतिक आवेश(Static Eleectricity) का बहुत बड़ा उदाहरण बादलों के टकराने के बाद दिखने वाली लाइटनिंग है। बादलों की परतों के बीच धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों का परस्पर आपस में घर्षण होने से बहुत बड़ी मात्रा में लाइटनिंग पैदा होती है।



लाइटनिंग को पहली बार 1752 ई. में बेंजामिन फ्रैंकलिन के द्वारा ही बिजली के समान कहा था। और इसको सिद्ध करने के लिए प्रसिद्ध Kite Experiment किया था। बेंजामिन फ्रैंकलिन ने ही पहली बार आवेशों के लिये धनात्मक और ऋणात्मक शब्दों का प्रयोग किया था।



स्थैतिक आवेश कैसे उत्पन्न होता है



स्थैतिक आवेश किसी वस्तु के भीतर इलेक्ट्रॉनों के असन्तुलित होने के कारण पैदा होता है। जो किसी वस्तु के बाहरी सतह पर तब तक रहता है जब तक की उसको प्रवाहित होने के लिए कोई वाहक नहीं मिलता। 

दोस्तो स्थैतिक आवेश को दो वस्तुओं के आपस में घर्षण करने से उत्पन्न किया जा सकता हैं। आपने गुब्बारे या फिर पैमाने को कभी अपने बालों में घिसा होगा उसके बाद क्या होता है सभी जानते हैं। छोटी-छोटी चीज़े आकर किसी बल के कारण चिपकने लगते हैं। 



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स्थैतिक आवेश का कारण

 

दोस्तो इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी मौजूद है वो परमाणु से मिलकर बना है। जैसे मानव शरीर में अरबों (Approx 37 ट्रिलियन) कोशिकाएं(सेल) होते है। एक सेल में भी अरबों (Approx 100 ट्रिलियन) परमाणु होते हैं। परमाणु में पदार्थ के तीन मौलिक कण या पार्टिकल होते हैं जिनको हम प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन के नाम से जानते हैं। 

प्रोटोन और न्यूट्रॉन परमाणु के नाभिक(केन्द्र) में होते हैं। प्रोटॉन पर धनावेश और न्यूट्रॉन पर कोई भी आवेश नही होता है। इसका मतलब न्यूट्रॉन उदासीन कण है। जिस वजह से नाभिक धनावेशित रहता है। दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित कण है जो की परमाणु के अंदर की कक्षाओं में नाभिक के चारों ओर रहता है।  

घर्षण के कारण किसी भी पदार्थ के परमाणु के बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रान (नेगेटिव चार्ज) जो की पदार्थ के परमाणु के नाभिक (पॉजिटिव चार्ज) से दूर होने के कारण हल्के बल से बंधे रहते हैं, जिससे ये इलेक्ट्रान दूसरी वस्तु में आ जाते हैं और आयन का निर्माण होता है। जिस वस्तु से इलेक्ट्रान निकलते हैं वो धनायन और जिस वस्तु में जाते हैं वो ऋणायन बन जाता है। 



इलेक्ट्रोस्थैतिक फ़ोर्स (बल)



सजातीय आवेशों(Like charge) में प्रतिकर्षण होता है जबकि विजातीय आवेशों(Unlike charge) में आकर्षण होता है। 

यदि दो समान आवेशित वस्तु को एक साथ लाया जाए तो उनमे प्रतिकर्षण होगा जबकि दो आसमान आवेशित वस्तुओं में आकर्षण होगा। 

घर्षण के दौरान जितने इलेक्ट्रान एक पदार्थ से निकलते है उतने ही इलेक्ट्रॉन दूसरा पदार्थ ग्रहण कर सकता है। अतः दोनो पदार्थों में समान संख्या में आयन बनते हैं। घर्षण को हटाने के बाद अर्थात पदार्थों को अलग करने के बाद भी ये आयन बने ही रहते हैं जो कि आसमान आवेशित चीजों को एक बल से अपनी तरफ खींचते हैं जिसको इलेक्ट्रोस्टेटिक फ़ोर्स कहते हैं। 


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स्थैतिक इलेक्ट्रिसिटी के प्रयोग



स्थैतिक इलेक्ट्रिसिटी का प्रयोग बहुत से क्षेत्रों में केया जाता है। जैसे-

जैरोग्राफ़ी(xerography):

इलेक्ट्रोस्टेटिक विधि द्वारा ज़ेरॉक्स(छायाप्रति) बनाने का तरीका


पेंटस्प्रेयर(Paint sprayer):

वस्तु(Object) और पेंट सप्रेयर को अलग-अलग(विजातीय) आवेशों से आवेशित किया जाता है। 


एयर फ़िल्टर:

स्थैतिक आवेशों के द्वारा वातावरण में नमी उत्पन्न करके धूल के कणों को हटाना। 


Precipitators:

हाई इलेक्ट्रोस्थैतिक वोल्टेज के द्वारा गैसों से धूल और धुँवा आदि के सूक्ष्म कणों को निकाल देती है। 


आशा करते हैं दोस्तो आप STATIC ELECTRICITY / स्थैतिक इलेक्ट्रिसिटी की जानकारी के सहमत होंगे यदि आपके कोई सवाल हैं तो आप नीचे कमेंट  बॉक्स में कमेंट कर सकते हैं। और इसी ही जानकारियों के लिए रेगुलर विजिट करें अपने Engineer Dost को। 
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